Saturday, January 5, 2008

क्या पृथ्वी तीन मिनट मैं बनी ?



पृथ्वी क्या तीन मिनट मैं बनी
द्वारा
नीतीश प्रियदर्शी
समय पहले विश्व की प्रमुख विज्ञान पत्रिका 'नेचर' में एक शोध पत्र छपा था कि पृथ्वी को बनने में तीन मिनट से भी कम समय लगा । शोधकर्ता थे आर वी जेन्त्री। यह रिपोर्ट आने के बाद विश्व के खोजकर्ताओं में बहस चल रही है कि इस शोध पर कितना विश्वास किया जाए ।
इस शोध के बाद लोगों को कुछ धर्मों कही गई बात कि पृथ्वी तुरंत तथा आज से ६००० वर्ष पहले बनी सत्य प्रतीत होती है।
भूवैज्ञानिक मान्यता है कि पृथ्वी को वर्तमान स्वरूप में आने में करोडो वर्ष लगे। विभिन्न radioactive और कार्बन डेटिंग से यह ज्ञात हुआ है कि पृथ्वी की आयु ४.५ बिलियन वर्ष है।
जेन्त्री ने granite पत्थर में मौजूद radioactive पदार्थ पोलोनियम -२१८ को लेकर शोध किया । उनका कहना है कि पोलोनियम-२१८ कि आधी आयु (Half life) महज तीन मिनट है । दूसरे शब्दों में कहें तो यह धातु कुछ ही मिनट तक विकिरण दे सकता है । अपने कम होने के दोरान यह अल्फ़ा विकिरण देता है जो बगल मे मौजूद धातु को प्रभावित करता है । धातु के चारो तरफ एक ring बन जाता है जिसको हम 'हेलोस' (प्रभामंडल) कहते हैं । उनका यह मानना है कि अगर इन छल्लो को चट्टानों मैं मौजूद रहना है तो चट्टानों को तरल से ठोस होने में तीन मिनट से भी कम समय लगना होगा नहीं तो सारे पोलोनियम-२१८ विलुप्त हो जायंगे तथा छल्लों का प्रभाव नहीं दिखेगा। अगर हम पोलोनियम-२१४ कि बात करे तो उसकी आयु महज .०००१६४ सेकंड है। अगर इनके द्वारा बनाए गए छल्ले हम चट्टानों में देखते हैं तो आप यह सहज यह अनुमान लगा सकते हैं कि चट्टानों को ठोस होने में कितना समय लगेगा । यानी एक सेकंड का हजार वां हिस्सा ।
उनका मानना है कि पोलोनियम अरबों कि संख्या में विश्व के granite चट्टानों में पाया जाता है तथा विश्व का आधा से ज्यादा हिस्सा इन चट्टानों का है। वे granite को ही धरती का मूल चट्टान मानते हैं.
कुछ भूवैज्ञानिकों का मानना है कि जेंत्री भोतिकी के जानकर हैं। उनको भूविज्ञान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। पृथ्वी कि आयु जानने के लिये जरूरी है कि हमे चट्टानों के प्रकृति कि गहन जानकारी होनी चाहिऐ। उन्होने सिर्फ एक चीज को देखकर निष्कर्ष निकाल लिया कि पृथ्वी तीन मिनट के अन्दर बनी।
आज अगर हम देखें तो लोग विज्ञान और धर्मं को एक साथ जोड़कर देखने कि कोशिश कर रहें हैं। बात कुछ भी हो इतना जरूर है कि धर्मं और विज्ञान के बीच की लड़ाई पहले भी थी और आज भी है और कल भी रहेगा।
डाक्टर नीतिश प्रियदर्शी
भूवैज्ञानिक
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