It will cover all types environmental and geological research work and studies both ancient and present. It will also cover impact of environment and geology on the human civilization. All types of news from all over the world related to environment and geology will also be discussed here.
Thursday, September 12, 2019
Saturday, October 21, 2017
हिमालय से भी करोडो साल पुरानी हैं झारखण्ड की नदियाँ।
यहाँ की नदियां करोडो साल पुरानी होंगी। गंगा यमुना से भी बहुत पुरानी।
द्वारा
डा. नितीश प्रियदर्शी
भूवैज्ञानिक
आज नदियों
अस्तित्व ही खतरे में है। सब जानते हैं कि नदियों के किनारे ही अनेक मानव सभ्यताओं का जन्म और विकास हुआ है। नदी तमाम मानव संस्कृतियों की जननी है। प्रकृति की गोद में रहने वाले हमारे पुरखे नदी-जल की अहमियत समझते थे। निश्चित ही यही कारण रहा होगा कि उन्होंने नदियों की महिमा में ग्रंथों तक की रचना कर दी और अनेक ग्रंथों-पुराणों में नदियों की महिमा का बखान कर दिया। भारत के महान पूर्वजों ने नदियों को अपनी मां और देवी स्वरूपा बताया है। नदियों के बिना मनुष्य का जीवन संभव नहीं है, इस सत्य को वे भली-भांति जानते थे। इसीलिए उन्होंने कई त्योहारों और मेलों की रचना ऐसी की है कि समय-समय पर समस्त भारतवासी नदी के महत्व को समझ सकें। नदियों से खुद को जोड़ सकें। नदियों के संरक्षण के लिए चिंतन कर सकें। अगर नदियां ही नहीं रहेंगी तो मानव सभ्यता ही खतरे में पद जाएगी। झारखण्ड में भी नदियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। नदियों का महत्व जानना हो तो इसके इतिहास को भी जानना होगा की कैसे और कब झारखण्ड में नदियां अस्तित्व में आईं। नदियों का जन्म एवं विकास एक लम्बी कहानी है। हर नदियों का अपना एक उद्गम स्थल होता है। नदी का उद्गम पहाड़, जंगल आदि क्षेत्र में होता है। इनका जन्म यकायक नहीं होता, प्रत्युत्त क्रमबद्ध विधि से अनेक जलधाराएं मिलकर एक पूर्ण विकसित सरिता का रूप लेती है। नदियों की उत्पत्ति कब हुई ये कहना बहुत मुश्किल है लेकिन संभावना व्यक्त की जा सकती है। अगर छोटानागपुर पठार की बात करे तो ये प्राचीनतम चट्टानों से निर्मित है। यहाँ के चट्टानों की आयु ६०० मिलियन वर्ष से भी अधिक है । तो यहाँ की नदियां भी करोडो साल पुरानी होंगी। गंगा यमुना से भी बहुत पुरानी। हिमालय बनने के बाद गंगा, यमुना इत्यादि नदियां अस्तित्व में आईं। झारखंड के पठार हिमालय से भी करोड़ों साल पुराने हैं। हिमालय की उत्पत्ति आज से लगभग ५० से ६० मिलियन वर्ष पहले शुरू हुई जब भारतीय प्रायद्वीप तिब्बत के पठार से टकराया। जब हिमालय बन रहा था उसी वक़्त झारखण्ड में भी काफी उथलपुथल हो रहा था। वैसे हिमालये बनने के करोड़ों साल पहले भी यहाँ उथल पुथल हुआ था जिसका साक्ष्य यहाँ के चट्टानों में पड़े वलन से पता चलता है। आज से लगभग ४०० मिलियन वर्ष पहले डेवोनियन काल में झारखण्ड में दामोदर घाटी का निर्माण हुआ जहाँ से होके दामोदर नदी बहती है। इस काल को मत्स्य काल भी कहते हैं। उस वक़्त पृथ्वी पर विशाल पर्वत बनने की प्रक्रिया चल रही थी। चट्टानों में लम्बी दरारें पड़ी जो शायद आगे चल के नदियों के उद्गम में प्रमुख भूमिका निभाया। आज जो हम रांची के पठार की बनावट देख रहे हैं करोडो साल पहले ऐसी नहीं थी। ये एक बेसिन था जो बाद में सेडीमेंट्स या अवसाद से भर गया तथा बाद में एक पठार का रूप लिए और उसके बाद शायद स्वर्णरेखा, कोयल, कारो इत्यादि नदियों की उत्पत्ति हुई होगी। हिमालय बनने के दौरान यहाँ ज्यादा ही उथल पुथल
हुआ।
घाटियाँ बनी , कुछ भाग उठा तो कुछ भाग धंसा, जल प्रपात बने ।
छोटानागपुर की पठार की नदियां या तो पहाड़ से निकली जैसे दामोदर या फिर धरती के नीचे से जैसे सवर्णरेखा। दामोदर नदी छोटानागपुर की पहाड़ियों से 610 मीटर की ऊँचाई से निकलकर लगभग 290 किलोमीटर झारखण्ड में प्रवाहित होने के बाद पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर 240 किलोमीटर प्रवाहित होकर हुगली नदी में मिल जाती है। लेकिन देखा जाये तो सारी नदियां पृथ्वी के नीचे से दरारों से होती हुई ऊपर आईं। हो सकता है की कुछ छोटी नदियों की उत्पत्ति ,हिमालय बनने के दौरान हुई ।
यहाँ की सारी नदियां बारिश के जल पर ही निर्भर हैं। इतना तय है की छोटनागपुर पठार की नदियां करोड़ों साल पुरानी
हैं। हिमालय से भी करोडो साल पुरानी।
Saturday, June 3, 2017
आसमानी बिजली से कैसे बचा जाये?
बिजली गिरने से हर साल कई लोगों की मृत्यु हो जाती है।
द्वारा
डा. नितीश प्रियदर्शी
भूवैज्ञानिक एवं पर्यावरणविद।
राँची ।
भारत में पिछले कुछ वर्षों से मौसम लगातार
बदल रहा है जिसके चलते आंधी तूफ़ान तथा आसमान से बिजली गिरने की खबर आ रही है।
बिजली गिरने से हर साल कई लोगों की मृत्यु हो जाती है। इस वर्ष भी आसमानी बिजली गिरने
की वजह से कई लोगों की असामायिक मृत्यु हुई खासकर बिहार , झारखण्ड
, ओड़िसा, मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों में। २०१६ में बिजली गिरने से बिहार, झारखंड
और मध्यप्रदेश में करीब १०० से ऊपर लोगों की
मौत हो गई, जबकि 24 लोग घायल
हुए। इस प्राकतिक आपदा में 13 पशुओं
की भी मौत हुई। बिहार के पटना, नालंदा, पूर्णिया, भोजपुर, रोहतास, बक्सर और
औरंगाबाद में आसमानी बिजली इंसानों पर कहर बनकर टूटी । झारखंड
और उत्तर प्रदेश में भी अलग-अलग जगहों पर बिजली गिरने से कई लोगों की मौत हुई। लोगों में जागरूकता की कमी से लोगों को जान से
हाथ धोना पड़ता है।
आइये ये जानने की कोशिश करें की जब आसमान में कस के बिजली चमक रही हो तो क्या करना
चाहिए। १. ऊँचे मकानो के अंदर पनाह ले और याद
रखें जब आखिरी बार बिजली चमकी हो उसके आधे
घंटे बाद तक उसी मकान के अंदर रहें। २. किसी
भी पेड़ के नीचे न जाएँ। ३. अगर आप गाडी चला
रहें हो तो रोक के उसी के अंदर रहें तथा गाडी के अंदर किसी धातु को न छुए। ४. अगर आप खुली जगह पे हैं जहाँ पर छिपने की कोई
भी जगह नहीं है तो किसी समतल या नीचे जगह वाले क्षेत्र में झुक कर बैठ जाएं। याद रखें ऊँची जगह या जल जमाव वाला क्षेत्र न हो। ५ मोबाइल टावर के आस पास गलती से भी न जाएँ। ६ मोबाइल फ़ोन को स्विच ऑफ कर दें अगर आप खुली जगह
पर हैं। ७. लोगों को लगता है की पाकेट से धातु
के सामानों को हटा देने से उनपर बिजली नहीं गिरेगी तो ये सोचना गलत है। ८ ऊँचे घरों पर तड़ित चालक जरूर लगाएं खासकर जो मकान
खुले में हों। ९. खेतों से तुरंत हट जाएँ। १०. जिनको पेसमेकर लगा हो वो ज्यादा सावधानी बरतें
और बादल जब गरज रहे हों तो घर से बाहर न निकले।
११. जंगल में होने पर निचले स्थान या घाटी क्षेत्र में रहें, लेकिन वहां आकस्मिक बाढ़ से
भी सावधान रहें। १२. किसी पहाड़ी की चोटी पर
खड़े न हों। १३. यदि आपके सिर के बाल खड़े हो
रहे हों तो आपके आसपास खतरा हो सकता है। १४.
अगर बादल गरज रहे हों, और आपके रोंगटे खड़े हो रहे हैं तो ये इस बात का संकेत है कि
बिजली गिर सकती है। १५. अगर किसी पर बिजली गिर जाए, तो तत्काल डॉक्टर की मदद मांगें। ऐसे लोगों को छूने से आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। अगर किसी पर बिजली गिरी है तो तत्काल उसकी नब्ज
जांचें और अगर आप प्रथम उपचार देना जानते हैं तो अवश्य दें। १६. बिजली गिरने के बाद
तुरंत बाहर न निकलें. अधिकाशं मौतें तुफ़ान गुज़र जाने के 30 मिनट बाद तक बिजली गिरने से होती
हैं। १७. दोपहर में इसके गिरने की अधिक आशंका होती है।१८. जब आप घर के भीतर हों तो
बिजली से संचालित उपकरणों से दूर रहें, तार वाले टेलीफोन का उपयोग नहीं करना चाहिए। खिडकियां
व दरवाजे बंद कर दें बरामदे और छत से दूर रहें। इसके अलावा ऐसी वस्तुएं जो बिजली के
सुचालक हैं उनसे भी दूर रहना चाहिए। धातु से बने पाइप, नल, फव्वारा, वाश बेसिन आदि के संपर्क से दूर रहना
चाहिए। १९. नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े ना रहें।
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